हाल ही में चर्चा में आए हिमानी नरवाल हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हिमानी नरवाल, जो एक 22 वर्षीय कांग्रेस कार्यकर्ता थीं, हरियाणा के रोहतक शहर में अकेले रहकर अपनी पढ़ाई कर रही थीं। उनकी हत्या एक मोबाइल शॉप चलाने वाले सचिन नामक व्यक्ति ने कर दी। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और इसकी जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
कैसे हुई थी हिमानी नरवाल की हत्या?
हिमानी और सचिन की जान-पहचान सोशल मीडिया पर करीब डेढ़ साल पहले हुई थी। कथित तौर पर, दोनों के बीच अफेयर था। हिमानी के पास सचिन और उनके रिश्ते का एक वीडियो था, जिसे वह ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल करती थीं। आरोपी सचिन पहले से शादीशुदा था और दो बच्चों का पिता था। 28 फरवरी को सचिन हिमानी के घर आया, और पैसों को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ। सचिन गुस्से में वहां से चला गया लेकिन कुछ घंटों बाद वापस लौटा। झगड़ा इतना बढ़ गया कि हाथापाई होने लगी, और हिमानी ने सचिन को एक चांटा मार दिया। इस पर सचिन का गुस्सा और भड़क गया, उसने पास रखे दुपट्टे से हिमानी के हाथ बांध दिए और मोबाइल चार्जर के वायर से उसका गला घोंट दिया।
हत्या के बाद क्या हुआ?
हत्या के बाद, सचिन ने हिमानी के गहने, मोबाइल और लैपटॉप लेकर वहां से चला गया। वह अपनी दुकान पर कुछ घंटे तक रहा और फिर वापस आकर सबूत मिटाने की कोशिश की। उसने हिमानी की लाश को एक सूटकेस में बंद कर दिया और बॉडी के ऊपर एक रजाई का कवर भी डाल दिया, जिस पर खून के धब्बे लग गए थे। रात 10:00 बजे, वह ऑटो से हिमानी की लाश को लेकर निकला और सांपला बस स्टॉप के पीछे फेंक दिया।
राजनीतिक एंगल की आशंका
हालांकि, इस हत्याकांड को लेकर हिमानी की मां ने एक अलग ही कहानी बताई है। उन्होंने इसे सिर्फ एक व्यक्तिगत अपराध मानने से इंकार किया और इसमें राजनीतिक षड्यंत्र होने की आशंका जताई। उनका दावा है कि उनकी बेटी को एक बड़ी साजिश के तहत मारा गया है।
निष्कर्ष
हिमानी नरवाल हत्याकांड केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि समाज के कई कड़वे सच सामने लाने वाला मामला है। यह घटना महिलाओं की सुरक्षा, ब्लैकमेलिंग, और अपराधों के पीछे के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर गहन सोच की जरूरत को उजागर करती है।









