भारत के रेल इतिहास में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। वंदे भारत ट्रेन कटरा से श्रीनगर के बीच अपनी पहली यात्रा शुरू करने जा रही है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई गई। यह ट्रेन न केवल आधुनिक भारत की प्रगति का प्रतीक है, बल्कि कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाला एक मजबूत पुल भी बन गई है।
कटरा से श्रीनगर तक ट्रेन सेवा का शुभारंभ
कटरा से लेकर श्रीनगर तक का सफर अब और भी सुविधाजनक और तेज़ होने वाला है। यह वंदे भारत ट्रेन कुल 8 कोच वाली है, जिसमें 653 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं। इसका डिज़ाइन खास तौर पर ठंडी जलवायु और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के हिसाब से तैयार किया गया है, जिससे कि बर्फबारी और तापमान गिरने की स्थिति में भी संचालन में कोई परेशानी ना हो।
हाईटेक सुविधाओं से लैस ट्रेन
इस ट्रेन में कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है:
- ड्राइवर केबिन हाईटेक स्क्रीन से सुसज्जित है जो किसी भी मौसम में साफ दृश्य प्रदान करता है।
- CCTV कैमरे हर कोच और केबिन में लगे हैं।
- वातानुकूलित कोच, आरामदायक सीटें और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड यात्रियों को जानकारी प्रदान करते हैं।
- ऑटोमेटिक डोर सिस्टम, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
दुर्गम रास्तों पर बना चमत्कारिक रेलवे ट्रैक
यह पूरा रेल ट्रैक 272 किलोमीटर लंबा है, जिसमें कुल 943 छोटे-बड़े पुल और 36 सुरंगें शामिल हैं। इनमें से एक सुरंग, T-50, करीब 12 किलोमीटर लंबी है। इस मार्ग में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चिनाब ब्रिज भी शामिल है, जिसकी ऊंचाई 359 मीटर है — यह एफिल टावर से भी ऊंचा है।
ट्रेन सेवा का टाइमटेबल और किराया
- सेवा प्रारंभ: 7 जून से आम यात्रियों के लिए ट्रेन शुरू होगी।
- समय: यह ट्रेन केवल दिन के समय चलेगी, हफ्ते में 6 दिन सेवा उपलब्ध रहेगी।
- समयावधि: कटरा से श्रीनगर तक का सफर महज़ 3 घंटे में तय होगा, जबकि सड़क मार्ग से इसमें 10-12 घंटे लगते हैं।
- किराया:
- चेयर कार: ₹250
- एग्जीक्यूटिव क्लास: ₹1325
सुरक्षा और तकनीकी विशेषताएं
इस रूट पर आतंकी खतरे की संभावना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। ट्रेन को केवल दिन के समय चलाने का निर्णय भी इसी उद्देश्य से लिया गया है। इंजीनियरिंग का कमाल यह है कि कठिन पर्वतीय और वन क्षेत्रों में भी इस ट्रैक को सफलतापूर्वक तैयार किया गया।
निष्कर्ष
वंदे भारत ट्रेन कटरा से श्रीनगर तक न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक विकास का नया अध्याय भी है। यह ट्रेन उन तमाम यात्रियों के लिए आशा की किरण है जो अब एक सुरक्षित, तेज और आरामदायक यात्रा का आनंद ले सकेंगे। यह भारत के आत्मनिर्भर और आधुनिक परिवहन नेटवर्क की दिशा में एक ठोस कदम है।











